तालिबान के खौफ से अफगान देश छोड़ने को मजबूर


 तालिबान के खौफ से अफगान देश छोड़ने को मजबूर


पासपोर्ट आवेदन के लिए 2,000 के मुकाबले रोजाना आ रहे 10,000 लोग न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस


काबुल अमेरिका और नाटी सेनाओं की वापसी के साथ ही तालिबान के बढ़ते प्रभाव और कब्जे से अफगानिस्तान के नागरिकों में खौफ है। इस कारण काबुल में पासपोर्ट कार्यालय के बाहर लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। नागरिक मानते हैं कि बिगड़ते हालात में हमें कभी भी देश छोड़ना पड़ सकता है।


अफगानिस्तान में तालिवान जिस तरह पैर पसार रहा है, उसके काबुल के पासपोर्ट कार्यालय पर सुबह से लग रही लंबी कतारें।


चलते साधन संपन्न अफगानी विदेश जाने का रास्ता तलाश रहे 52 अल खालिद नविचार कभी नाटी सैन्य ठिकाने पर दुकान चलाते थे लेकिन अब असुरक्षित महसूस करते हैं। यहाँ पर व्यवस्था बना रहे एक Police अधिकारी ने बताया आमतौर


उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद व्यर्थ


पासपोर्ट आवेदकों की कतार में लगी 23 वर्षीय कंप्यूटर साइंस की छात्रा जीनत बहार नजरी ने बताया कि जब हम बच्चे थे, हमारे परिजनों ने कहा कि तालिवान ने लोगों को मार डाला और उन्हें कर दिया। ये महिलाओं के प्रति हिंसक थे। लेकिन तब वे बहुत छोटी थी अब वे जो देख रही है उससे पता चलता है कि यदि ये आगे पढ़ाई की सोचे तो की उनकी आशा व्यर्थ है। उन्होंने कहा, तालिबान सिर्फ आतंक का चेहरा है जो सिर्फ लड़ाई, आत्मघाती धमाके और खून पर भरोसा करता है। 52 वर्षीय सरदार कहते हैं, हमारा जीवन खतरे में है, हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।


हैं। काबुल में सुबह 8 बजे से Passport की लंबी कतार में लगे चीन पहुंचा तालिबान, विदेश मंत्री को दिया सुरक्षा का आश्वासन


तियानजिन अमेरिकी सैन्य वापसी की घोषणा के बाद पहली बार तालिबान मुल गनी बरादर के नेतृत्व में चीन ने विदेश मंत्री से मिलकर उन्हें आश्वस्त किया हमारी पर 2,000 के मुकाबले अब एक ही दिन में 10,000 लोग सहजमों का इस्तेमाल चीन की सुरक्षा के खिलाफ नहीं करेंगे। अफगानिस्तान को आवेदन के लिए आ रहे हैं। सुबह 5 बजे से 36 वर्षीय इंजीनियर सीमा चीन के नियम से मिलती है जहां बड़ी संख्या में उड़गर रहते हैं और अपनी पत्नी-बच्ची समेत पासपोर्ट कार्यालय पर आ डालिबान से संपर्क में है। चैन की चिंता यह है कि तालिवान उइगर समुदाय को गए थे। उनसे पहले 300 लोग कतार में लग चुके थे। उन्होंने चीन के खिलाफ भड़का सकता है। लेकिन यात्रा के प्रभाव में तालिबान चीन से


बताया कि अब इस देश में रहना परिजनों की जान से खेलना है। रिश्ते बढ़ा रहा है। उसने चीन को अपना दोस्त करार दिया। एजेंसी


बराटर के नेतृत्व में वांग यी के साथ तालिबान नेता।

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