सपा की तेल बांटो राजनीति नीचे दिए व्यंजन को जाने


 सपा की तेल बांटो राजनीति


में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसकी तैयारियां राजनीतिक पार्टियों ने शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी ने भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अब तक एम वाय यानी मुस्लिम यादव फैक्टर पर काम करने वाली सपा अब एम वाय डी फैक्टर बनाने में जुट गई है। इसमें मुस्लिम और यादव के साथ-साथ दलितों को भी शामिल किया जाएगा। समाजवादी पार्टी (सपा) के सामने मौजूदा समय में कई चुनौतियां हैं। इनमें प्रमुख है वोटों के ध्रुवीकरण को रोकना। इसके साथ ही सपा को पिछड़ों और अति पिछड़ों को और ज्यादा संख्या में पार्टी से जोड़ना। मुस्लिम वोटों को बिखरने से रोकना भी सपा के लिए अब जरूरी हो गया है। यह भी जरूरी है कि सपा ऐसे


लोगों से गठबंधन करे जो खुद भी फायदा उठाएं और सपा को भी वोटों का लाभ मिले। सपा अध्यक्ष हालांकि अब संभल संभल कर कदम उठा रहे हैं। उन्होंने साफ्ट हिन्दुत्व पर चलने का संकेत दिया है। किसानों के आंदोलन को भी हवा दी है और उनकी सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास किया है। गठजोड़ के लिए मजबूत साथी की भी तलाश कर रहे हैं। जातीय समीकरणों को भी साध रहे हैं लेकिन उसका तरीका सपा का उद्देश्य पूरा कर पाएगा, इसमें संदेह है। अयोध्या में सपा नेता पंडित समरजीत ग्रामीण महिलाओं में आधे-आधे लीटर सरसों की तेल की बोतल वितरित कर रहे हैं। वितरण के साथ ही समाजवादी पार्टी की प्रमुख घोषणाओं जिक्र भी कर रहे हैं। अयोध्या के दिव्यांग सपा नेता दिव्यांग पंडित समरजीत ने ग्रामीण क्षेत्र के भरत कुंड पिपरी जलालपुर स्थित निषाद बस्ती में पहुंचकर एक दर्जन से अधिक महिलाओं को सरसों की तेल की बोतल दी। इन बोतलों पर समाजवादी पार्टी की तीन प्रमुख घोषणाएं लिखी हुई हैं। उसका जिक्र भी किया गया है जिसमें 20 लाख युवाओं को रोजगार, हर घर में 300 यूनिट बिजली फ्री और एक करोड़ महिलाओं को 1500 रुपये समाजवादी पेंशन देने की बात कही गयी है। इस कार्यक्रम के बारे में दिव्यांग सपा नेता पंडित


अशोक त्रिपाठी


देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में 2022 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने कई तरह से कमर कस ली हैं। इसी का एक तरीका महंगाई से जूझ रही जनता को सरसों का तेल बांटना है। अयोध्या में बढ़ती महंगाई को लेकर समाजवादी पार्टी के दिव्यांग सपा नेता पंडित समरजीत ने ग्रामीण महिलाओं में समाजवादी सरसों का तेल निःशुल्क वितरित किया। खास बात यह है कि समाजवादी सरसों के तेल की बोतल पर सपा का स्टिकर लगाकर पार्टी की प्रमुख 3 घोषणाओं का भी जिक्र किया गया है। यही नहीं तेल के स्टीकर पर पूर्व रक्षा मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व उनकी पत्नी डिंपल यादव की फोटो भी लगाई गई है। जाहिर है कि सरसों का तेल बांटने के पीछे परोपकार और जनसेवा के नाम पर पार्टी का चुनाव प्रचार किया जा रहा है। हालांकि केंद्र और कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने भी राशन देने के लिए जो थैला दिया है, उसे भी प्रचार से अछूता नहीं रखा गया है। सपा अगर उसका जवाब इस तरह से दे रही है तो भी यही कहना पड़ेगा कि सपा का जवाब कमजोर है। उत्तर प्रदेश


सपा नेता दिव्यांग पंडित समरजीत ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार मैं महंगाई इतनी बढ़ गई है कि गरीबों की थाली से भोजन गायब हो रहा है, इसीलिए ग्रामीण महिलाओं में सरसों का तेल वितरित किया गया क्योंकि इस समय सरसों का तेल 190 रुपये प्रति लीटर बाजार में बिक रहा है। भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाते हुए सपा नेता दिव्यांश पंडित समरजीत ने कहा कि 2022 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा की बुरी हार होगी। एक बार फिर समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। आज से लगभग 8 साल पहले बरेली में समाजवादी पार्टी की रैली को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि बसपा सरकार ने अपने शासनकाल में लूट मचाई थी और सपा सरकार राज्य को विकास की राह पर ले जाना चाहती है। उस समय मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार नहीं बनी थी लेकिन गुजरात माडल को आगे करके नरेंद्र दामोदर दास मोदी दिल्ली की तरफबढ़ रहे थे। अखिलेश ने मोदी का नाम लिए बगैर कहा था कि गुजरात के शेर पर नकेल सपा कसेगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कहा था कि देश में आर्थिक संकट के लिए केन्द्र की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। रामगोपाल यादव ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए।

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